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निखिल की डायरी

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#समीक्षित 🌷 मुझे कुछ बुनियादी चीज़ों की जानकारी भी तब ठीक से नहीं थी। मुझे नहीं पता था कि .... क्या कितना सही है और क्या कितना ग़लत? मुझे नहीं पता था कि भविष्य और वर्तमान में से किसे चुनना चाहिए ... और मैंने बिना ज़्यादा सोचे - समझे वर्तमान चुन लिया। सब कुछ जैसा था , वैसा बना रहा कुछ दिन..... और फिर अचानक एक दिन मुझे पता चलता है कि उस शख़्स ने भविष्य चुन लिया जिसके लिए मैंने अपने अतीत में अपना वर्तमान चुना था।  मुझे नहीं पता कि मैं कौन से काल में जी रहा हूं । यह मेरे अतीत का भविष्य हो सकता है या मेरे भविष्य का अतीत। वर्तमान जिसे मैंने चुना था __  मुझे लगता है कि वास्तव में उसकी कोई यथार्थ सत्ता है ही नहीं।  मेरे  इर्द-गिर्द सब कुछ  खुद ब खुद  हो रहा है ।  क्यों हो रहा है .....नहीं मालूम । शायद इसलिए क्योंकि उसे होना ही है । मुझे तैरना नहीं आता और मुझे तेज़ बहती नदी में गिरा दिया गया। मैं दूर तक बहे जाने के लिए अभिशप्त हूं । बह रहा हूं क्योंकि तैर नहीं सकता... अपने हिसाब से ; फिर  अगर तैरना आता भी हो तो इस तेज़ बहाव में तैरना आसान नहीं  और म...

माधव_और_संवेदना

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#समीक्षित दुनिया भी एक झटके में खत्म हो जाएगी... बिना कोई दूसरा मौका दिए ।  हमने कहा था एक दूसरे से कि ''शाम को फोन करेंगे।'' ... हालांकि यह कोई वादा नहीं था, पर फिर भी एक भरोसे का प्रतीक तो था ही यह कहना कि 'फोन करेंगे'। __ मतलब हमारे बीच अभी कुछ ऐसा है जिस पर बात की जा सकती है... कुछ ऐसा है जो हमारे नंबर्स को एक दूसरे के कॉल लॉग्स में ऊपर उठा सकता है। पर पहल कैसे की जाए? और होता है इंतजार कि सामने वाला करें कोई शुरुआत.... और कोई फोन नहीं आता। फोन का मौन व्रत लगातार जारी रहता है। 😕 माधव ने एक बार मुझसे इस बात का जिक्र किया था कि इन दिनों संवेदना से बात नहीं हो पा रही है ठीक से। आज भी उसने  '' पापा आ गए हैं'' बोल कर फोन रख दिया।__ इस बात को लगभग 5- 6 महीने बीत चुके हैं और लगातार 'पापा आ गए हैं' , 'मम्मी बुला रही है'  का जो नतीजा निकला वह बताने की जरूरत नहीं।   माधव कितना बेचैन है,,, नहीं बता सकता_ पर शायद इतना बेचैन मैं कभी नहीं हुआ था स्नेहा के लिए  क्योंकि मैं और स्नेहा कभी एक रिश्ता  बना ही नहीं पाए। और वो जो रिश्ते  जैसा बना ...

खालीपन

#समीक्षित 🌷 दिन को रेत की तरह हाथों से फिसलते देखना ...हर रात माधव को परेशान करता है।  सबको अपनी ज़िंदगियों में व्यस्त देखकर माधव अच्छा महसूस करता है .... उसके माथे पर बल पढ़ते है...

अन्वेशा 🌷

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#समीक्षित   माधव के सिवा यहां सब का मानना था कि सहेलियों को आगे जाने देकर अन्वेशा का अकेले पीछे-पीछे आना इसीलिए है कि माधव उससे बात करें उसके साथ चलें ... पर अब माधव  इस रिश्ते को और उलझाने के चक्कर में नहीं है  । यह रिश्ता , इसको चाहे जो भी नाम दिया गया हो,  वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं रखता । रिश्ते में दोनों का होना जरूरी है और अन्वेशा रिश्ते को जिस जगह ले जा  रही थी वहां तक कम से कम माधव  की पहुंच नही थी । माधव बारहां  कोशिश करके भी वहां नहीं पहुंच सकता था ।  माधव को ज़िंदगी जीने के लिये देखना पड़ता है पीछे की तरफ। अन्वेशा को लगता है कि ये हार्ट वाला इमोजी माधव सिर्फ उसे सेंड करता है .... ये फूलों की तस्वीरें सिर्फ उसे भेजने के लिए खींचता है ।  और रोमांटिक स्टेटस सिर्फ इसलिए लगाता है ताकि अन्वेशा देख सके ।  काश ! कोई अन्वेशा को बता पाता कि वह पूरी तरह से गलत है ... सौ प्रतिशत नहीं , हजार प्रतिशत ।  सभी को भेजता है माधव मुस्कुराते फूलों की तस्वीरें 🌷🌷 । सभी को भेजता है दिल छू जाने वाले नग़मे 🎶🎶। ...

मौजूदगी ।

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मौजूदगी इस बिस्तर पर बैठकर आज कुछ भी लिख पाना मुमकिन नहीं है.... इसकी एक-एक सिलवट मुझे बीते हुए कल में खींचकर ले जा रही है । हालांकि एक झटके में मिटाई जा सकती है इस पर नजर आ रही सारी सिलवटें .....पर मन , मन मारकर कर बैठा है एकदम चुपचाप। तकिया अभी भी दीवार से लग कर ही रखा हुआ है  , किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत से एकदम बेखबर । कमरे में मौजूद है एक खुशबू अब तक ; मेरा दिमाग रोक रहा है मुझे सांसे लेने से , इल्जाम लगा रहा है मुझ पर कि मेरी वजह से मिट रही है कमरे से खसखस और गुलाब के मिले-जुले एहसास वाली खुशबू । मेरा बस चलता तो यूनेस्को द्वारा संरक्षित करवा देता यह कमरा.... यह घर... यह गली... सब । पर मेरे बस में नहीं है इतना भी कि एक बोर्ड रख दूं यहां जिस पर लिखा हो - ''प्रवेश वर्जित । कार्य प्रगति पर है । '' कविताओं के अनबूझे अर्थ आज समझ आ रहे हैं... खुल रहे हैं खुद-ब-खुद ; कमरे का टेंपरेचर भी बाहर  से कई गुना कम है ; गिटार बजा रहा है मदमस्त धुनें अपने आप ही । कल शाम को वो यहींं थी इसी कमरे में   शिवम् सागर समीक्षित ♥ 9557301043