असुविधा के लिए खेद है ।
''कौन सी दुनिया में रहते हो तुम ? कितना कुछ झेला है हिंदुस्तान ने इन लोगों की वजह से...आज तुम जैसे कुछ लोग कुछ समझते ही नहीं ।''....... '' राजपूतों और मराठों के इतिहास को मिटा रहे हैं तुम जैसे लोग ।''..... ''क्या हो गया है सभी हिंदुओं को '' ....... ''पाकिस्तान शिफ्ट हो जाना चाहिए '' ...... आदि आदि । ईद मुबारक़ के स्टेटस लगाने से पहले ही मुझे पता था कि हर बार की तरह इस बार भी कई जगह से तीखी प्रतिक्रिया आएंगी। अब जो भी हो मैं ऐसा ही हूं । और वास्तव में ही . . .मैं ना जाने कौन सी दुनिया में रहता हूं . . . जो मेरे आस- पास आने वाले और धीरे-धीरे मेरे खास बन जाने वाले अधिकांशतः लोग अपनी जाति- धर्म की उन 'सो कॉल्ड' छवियों से दूर, बहुत दूर होते हैं जिन छवियों के कारण उन्हें प्रशंसित या दमित किया जाता रहा है। मैं ऐसे मुस्लिमों को जानता हूं जिन्होंने अपने कमरे में राधा कृष्ण की मूर्ति रखी हुई है, जिन्होंने अपने आँगन में तुलसी का पौधा लगाया हुआ है । ऐसे ब्राह्मणों को जानता हूं जो उर्दू से लेकर नमाज़ पढ़ने तक के तौर ...