ये दिन खास सा है।
ये दिन ख़ास सा है मुकम्मल हुई थी खुदा की बनाई एक बेहद निराली सी तस्वीर इस दिन । उसी की खुशी है जो मै जी रहा हूँ उसी की खुशी है जो मै पी रहा हूँ ... उसी की वज़ह से मै ये लिख रहा हूं । उसी की वज़ह से है तरतीब मे सब , ये खुर्शीद- तारे बताओ क्यों जगमग चमकते सुब्हो शाम ? आखिर क्या मसला है इनका ... ? यक़ीनन महज़ जल रहे है जो कर ली है रंजिश उसी से, जिसे अपना महबूब कहने की ख्वाहिश दबाये हुए दिल हमारा... जिये जा रहा है , किये जा रहा है _ वही काम अपना बताती है जितना उसे बायोलॉजी । तुम्हे उसकी तस्वीर कैसे दिखाऊं , जिसे देख कर कैमरे हों दिवाने सभी अपने फंक्शन भुला दें । भुला दें _ लगा टाइमर सेल्फ़ी लेने की कोशिश करी हमने जब भी मियां नीप्से ! कैमरा ये हमेशा ही भूला कि क्या काम उसका .... ये ब्लर - फ़्लैश - पोट्रेट ये टाइमर... ये पल पल के मसले ... नहीं उसको आते ज़रा भी ज़रा भी । यकीं मानो हम देखते है उसे अब भी बंद करके आंखे । खुली आंखो से झेलना ताब उसका भला किसको मुमकिन। उसका अंदाज़े...