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Showing posts with the label माधव और संवेदना

मैं शहर छोड़ना चाहता हूँ

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'' मैं चाहता हूं कि ये शहर छोड़ दूं ''- माधव ने कहा और मैंने अनसुना करने की कोशिश की । '' तुम्हारा क्या ख्याल है ?''- वह जवाब चाहता था ।  '' किस बारे में ? ''-  मैंने उसे सवाल को बदलने का एक मौका सा दिया । '' मैं शहर छोड़ना चाहता हूं ''- माधव ने सवाल नहीं बदला । '' कहां जाओगे फिर ?''- सवाल वाजिब था । माधव की ख़ामोशी ने उसकी तरफ से जवाब दिया । मैंने कहना जारी रखा - ''शहर बदलना_ व्हाट्सएप की डीपी बदलने जैसा नहीं है ,,, कि मूड ऑफ हुआ और ब्लैक कर दी । तुम शहर छोड़ दोगे पर क्या ये शहर तुम को छोड़ देगा ? बी लॉजिकल ।''  '' भक् साला लॉजिक ! हमको लॉजिक समझा रहे हो ? लॉजिक समझाना है तो उसे समझाओ ! पूछो जाकर उससे कि मेरे साथ रात मे चौराहों में टहलने का क्या लॉजिक था ? कैफ़े में एक कॉफ़ी  के सहारे दो लोगों के बैठे रहने का क्या लॉजिक था ? रात के पौने दो बजे वीडियो कॉल में - ''गिटार सुनना है'' कह देना कौन सा लॉजिक है ? बताना भाई ! बता मुझे ! उसने गिटार की धुन सुनी और मैंने घर वालो...

उसे किताबों का बड़ा शौक था ।

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#समीक्षित #माधव_और_संवेदना उसे किताबों का बड़ा शौक था । ढेर सारी किताबों को इकट्ठा किया करती. . . उसके घर की सारी अलमारियों उसके इस शौक का सबूत थी । वह हर समय कुछ ना कुछ पढ़ती रहती थी . . .किताब दर किताब। वो कहती थी _ '' किसी किताब को पढ़ने के लिए एक दिन, समझने के लिए एक हफ्ता और जिंदगी में उतारने के लिए एक उम्र चाहिए होती है।''   उसने दुनिया भर का न जाने कितना लिटरेचर पढ़ा था _ मोपासां, गुस्ताव, टॉलस्टॉय ,चेखव, टैगोर मंटो ,रोबेर्तो_ और भी न जाने कितने नाम लिया करती थी वो . . . उन सबको पढ़ती थी वो और मैं उससे उन सब के किस्से सुनता था ।  शाम को बात करते करते धीरे-धीरे पता चलने लगता कि उसने आज क्या पढा ।  एक रात उसने मुझे मोपासां की कहानी सुनाई-  कहानी अच्छी लगी मुझे भी , पर उसका कहना था कि ये एक लव स्टोरी है और मुझे उस में कहीं भी लव एलिमेंट्स नहीं दिखे । उसने फिर से कहा कि ये एक लव स्टोरी है -  मैरिड-लाइफ की लव स्टोरी ।  इस बात ने मुझे खामोश कर दिया । मैरिड- लाइफ वाली बातें मुझे न तब समझ आती थी ना अब आती हैं ठीक लिटरेचर की तरह।  मुझे लगता है कि शादी क...

निखिल की डायरी

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#समीक्षित 🌷 मुझे कुछ बुनियादी चीज़ों की जानकारी भी तब ठीक से नहीं थी। मुझे नहीं पता था कि .... क्या कितना सही है और क्या कितना ग़लत? मुझे नहीं पता था कि भविष्य और वर्तमान में से किसे चुनना चाहिए ... और मैंने बिना ज़्यादा सोचे - समझे वर्तमान चुन लिया। सब कुछ जैसा था , वैसा बना रहा कुछ दिन..... और फिर अचानक एक दिन मुझे पता चलता है कि उस शख़्स ने भविष्य चुन लिया जिसके लिए मैंने अपने अतीत में अपना वर्तमान चुना था।  मुझे नहीं पता कि मैं कौन से काल में जी रहा हूं । यह मेरे अतीत का भविष्य हो सकता है या मेरे भविष्य का अतीत। वर्तमान जिसे मैंने चुना था __  मुझे लगता है कि वास्तव में उसकी कोई यथार्थ सत्ता है ही नहीं।  मेरे  इर्द-गिर्द सब कुछ  खुद ब खुद  हो रहा है ।  क्यों हो रहा है .....नहीं मालूम । शायद इसलिए क्योंकि उसे होना ही है । मुझे तैरना नहीं आता और मुझे तेज़ बहती नदी में गिरा दिया गया। मैं दूर तक बहे जाने के लिए अभिशप्त हूं । बह रहा हूं क्योंकि तैर नहीं सकता... अपने हिसाब से ; फिर  अगर तैरना आता भी हो तो इस तेज़ बहाव में तैरना आसान नहीं  और म...

माधव_और_संवेदना

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#समीक्षित दुनिया भी एक झटके में खत्म हो जाएगी... बिना कोई दूसरा मौका दिए ।  हमने कहा था एक दूसरे से कि ''शाम को फोन करेंगे।'' ... हालांकि यह कोई वादा नहीं था, पर फिर भी एक भरोसे का प्रतीक तो था ही यह कहना कि 'फोन करेंगे'। __ मतलब हमारे बीच अभी कुछ ऐसा है जिस पर बात की जा सकती है... कुछ ऐसा है जो हमारे नंबर्स को एक दूसरे के कॉल लॉग्स में ऊपर उठा सकता है। पर पहल कैसे की जाए? और होता है इंतजार कि सामने वाला करें कोई शुरुआत.... और कोई फोन नहीं आता। फोन का मौन व्रत लगातार जारी रहता है। 😕 माधव ने एक बार मुझसे इस बात का जिक्र किया था कि इन दिनों संवेदना से बात नहीं हो पा रही है ठीक से। आज भी उसने  '' पापा आ गए हैं'' बोल कर फोन रख दिया।__ इस बात को लगभग 5- 6 महीने बीत चुके हैं और लगातार 'पापा आ गए हैं' , 'मम्मी बुला रही है'  का जो नतीजा निकला वह बताने की जरूरत नहीं।   माधव कितना बेचैन है,,, नहीं बता सकता_ पर शायद इतना बेचैन मैं कभी नहीं हुआ था स्नेहा के लिए  क्योंकि मैं और स्नेहा कभी एक रिश्ता  बना ही नहीं पाए। और वो जो रिश्ते  जैसा बना ...

खालीपन

#समीक्षित 🌷 दिन को रेत की तरह हाथों से फिसलते देखना ...हर रात माधव को परेशान करता है।  सबको अपनी ज़िंदगियों में व्यस्त देखकर माधव अच्छा महसूस करता है .... उसके माथे पर बल पढ़ते है...

अन्वेशा 🌷

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#समीक्षित   माधव के सिवा यहां सब का मानना था कि सहेलियों को आगे जाने देकर अन्वेशा का अकेले पीछे-पीछे आना इसीलिए है कि माधव उससे बात करें उसके साथ चलें ... पर अब माधव  इस रिश्ते को और उलझाने के चक्कर में नहीं है  । यह रिश्ता , इसको चाहे जो भी नाम दिया गया हो,  वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं रखता । रिश्ते में दोनों का होना जरूरी है और अन्वेशा रिश्ते को जिस जगह ले जा  रही थी वहां तक कम से कम माधव  की पहुंच नही थी । माधव बारहां  कोशिश करके भी वहां नहीं पहुंच सकता था ।  माधव को ज़िंदगी जीने के लिये देखना पड़ता है पीछे की तरफ। अन्वेशा को लगता है कि ये हार्ट वाला इमोजी माधव सिर्फ उसे सेंड करता है .... ये फूलों की तस्वीरें सिर्फ उसे भेजने के लिए खींचता है ।  और रोमांटिक स्टेटस सिर्फ इसलिए लगाता है ताकि अन्वेशा देख सके ।  काश ! कोई अन्वेशा को बता पाता कि वह पूरी तरह से गलत है ... सौ प्रतिशत नहीं , हजार प्रतिशत ।  सभी को भेजता है माधव मुस्कुराते फूलों की तस्वीरें 🌷🌷 । सभी को भेजता है दिल छू जाने वाले नग़मे 🎶🎶। ...

माधव की डायरी 2

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माधव ने आज फिर एक पुरानी डायरी उठा ली । उस पन्ने पर ठीक से लिखा दिख रहा था सब कुछ लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वहां उस दिन सब ऐसा ही था । माधव को अच्छे से याद है कि उस शाम भी ठीक सा दिख रहा था सब, अच्छे से बातें करते - करते उसने नाश्ता किया था पूर्वा के घर पर ; तारीफ की थी पकोड़ों की । सूरज ढलने के बाद मौसम में सर्दपन महसूस होने लगा था । वहां से लौटते वक्त उसने लंबा रास्ता अख्तियार किया था और सोचा था कि अच्छा होता अगर वह हाफ स्वेटर पहन के निकला होता । दुर्गा पूजा पार्क के आगे वाली गली में उसे विनायक मिला था । कुछ देर बात हुई थी उससे भी , उसी ने बताया था कि पुनीत दोस्तों के साथ 'अपने नए दोस्तों के साथ' हिमाचल घूमने गया है  । हम लोगों से पूछना तो दूर , बताया तक नहीं । घर आते-आते माधव को देर हो गई थी । माधव के लिए घर में देर से पहुंचने का मतलब था पापा के घर  आने चुकने के बाद घर पहुंचना; और पापा किस दिन , किस वक़्त लौटेंगे... यह पूरी तरह पापा को भी कंफर्म नहीं होता था । पर पापा ने भी उस दिन कुछ नहीं कहा । मम्मी ने भी छोले बनाए थे उस दिन...... कितना अच्छा था वह दिन !...

माधव की डायरी

ब्लैक होल... आखिरकार दुनिया ने वह चीज भी देखनी जिस से टकराकर रोशनी तक नहीं लौटती ! अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक इसे दुनिया को समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी बता रहे हैं । भगवा घेरे ...

निखिल।

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#समीक्षित '' गिटार के तार बजते भले ही बाहर हों ... पर छेड़ा उन्हें अंदर जाता है .., दिल के अंदर ।''- माधव निखिल को कुछ समझाने की कोशिश कर रहा था । निखिल को घंटा कुछ समझ आ रहा था । आस-पास के दो-चार मुहल्लों में अगर कोई लड़का इन दिनों सच्चे इश्क में था , तो वह निखिल था । इश्क के शहर में अभी हाल ही में दाखिल हुए निखिल को  इश्क हर मर्ज की दवा लगता , हर मुश्किल का हल लगता । इन दिनों हर बात , हर मसले - मुश्किल को सुलझाने की कुब्बत रखने वाला निखिल ''मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती'' वाले पड़ाव पर जी रहा था ''घर वाले नहीं मानेंगे'' वाली सच्चाई से बिल्कुल बेखबर  । वो बड़े खूबसूरत सपने सजाता और उन्हे अपने दोस्तों के साथ में साझा करता । माधव को इश्क में नाकाम होते देख सोचता कि उसके और कामिनी के बीच आने वाली मुश्किलों को वह कितने अच्छे से हैंडल कर लेता है । वो माधव को भी एक सांस में कई सजेशन दे डालता है , माधव सुनता है उसे .... बड़ी खामोशी के साथ ।  आखिर बस मुस्कुरा देता है । करने को माधव आगाह कर सकता है निखिल को पर निखिल ने अभी-अभ...