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लघु कविताएं ।

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1) बेखयाली को ख़यालों से दबाकर समेट रहा हूं बेचैनियों को___ बेहद चैन से मैं , अभी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाऊंगा। 2) ज़ुबान से कितनी ही ज़ुबानें बोल लो तुम ; एक ही जुबान है आंखों की और वह आती है मुझे , शायद तुम से भी बेहतर । 3) ना ना .... अभी इधर मत आना सोई है रौशनी अंधेरों की रिदा ओढ़कर सुबह होने तक का इंतजार करो अगर अकेले हो ....तो मेरे पास बैठो __कुछ बात करो । 4) अक्सर__ तुम्हारे बारे में सोचते हुए सर दर्द हो जाता है ,,, मेरे दिल को कोई इलाज है क्या तुम्हारे पास ? -शिवम सागर 9557301043

ग़ज़ल

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पूछा मैंने  कई इक  दफ़ा , उसने पर कुछ कहा ही नहीं अब तो लगता है कि दरमियां अपने कुछ भी रहा ही नहीं ज़िंदगी ले गई ज़िंदगी ,मुझ में कुछ भी बचा ही नहीं हम दवा ले रहे हैं मगर , मर्ज़   का कुछ पता ही नहीं वैसे भी कह रहे थे सभी ख़ास इतनी ख़ता ही नहीं पर तेरे रहम का शुक्रिया , तूने दी कुछ सज़ा ही नहीं कहने को तो हैं कहते सभी , कहने में सच मनाही नहीं फिर वही लोग सच की कभी खुद  ही देते गवाही नहीं करके देखी बचत उम्र भर हाल हो पाया शाही नहीं कतरे ही जोड़ता रह गया.., पर मैं सागर बना ही नहीं #शिवम_सागर

अन्वेशा 🌷

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#समीक्षित   माधव के सिवा यहां सब का मानना था कि सहेलियों को आगे जाने देकर अन्वेशा का अकेले पीछे-पीछे आना इसीलिए है कि माधव उससे बात करें उसके साथ चलें ... पर अब माधव  इस रिश्ते को और उलझाने के चक्कर में नहीं है  । यह रिश्ता , इसको चाहे जो भी नाम दिया गया हो,  वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं रखता । रिश्ते में दोनों का होना जरूरी है और अन्वेशा रिश्ते को जिस जगह ले जा  रही थी वहां तक कम से कम माधव  की पहुंच नही थी । माधव बारहां  कोशिश करके भी वहां नहीं पहुंच सकता था ।  माधव को ज़िंदगी जीने के लिये देखना पड़ता है पीछे की तरफ। अन्वेशा को लगता है कि ये हार्ट वाला इमोजी माधव सिर्फ उसे सेंड करता है .... ये फूलों की तस्वीरें सिर्फ उसे भेजने के लिए खींचता है ।  और रोमांटिक स्टेटस सिर्फ इसलिए लगाता है ताकि अन्वेशा देख सके ।  काश ! कोई अन्वेशा को बता पाता कि वह पूरी तरह से गलत है ... सौ प्रतिशत नहीं , हजार प्रतिशत ।  सभी को भेजता है माधव मुस्कुराते फूलों की तस्वीरें 🌷🌷 । सभी को भेजता है दिल छू जाने वाले नग़मे 🎶🎶। ...

माधव की डायरी 2

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माधव ने आज फिर एक पुरानी डायरी उठा ली । उस पन्ने पर ठीक से लिखा दिख रहा था सब कुछ लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वहां उस दिन सब ऐसा ही था । माधव को अच्छे से याद है कि उस शाम भी ठीक सा दिख रहा था सब, अच्छे से बातें करते - करते उसने नाश्ता किया था पूर्वा के घर पर ; तारीफ की थी पकोड़ों की । सूरज ढलने के बाद मौसम में सर्दपन महसूस होने लगा था । वहां से लौटते वक्त उसने लंबा रास्ता अख्तियार किया था और सोचा था कि अच्छा होता अगर वह हाफ स्वेटर पहन के निकला होता । दुर्गा पूजा पार्क के आगे वाली गली में उसे विनायक मिला था । कुछ देर बात हुई थी उससे भी , उसी ने बताया था कि पुनीत दोस्तों के साथ 'अपने नए दोस्तों के साथ' हिमाचल घूमने गया है  । हम लोगों से पूछना तो दूर , बताया तक नहीं । घर आते-आते माधव को देर हो गई थी । माधव के लिए घर में देर से पहुंचने का मतलब था पापा के घर  आने चुकने के बाद घर पहुंचना; और पापा किस दिन , किस वक़्त लौटेंगे... यह पूरी तरह पापा को भी कंफर्म नहीं होता था । पर पापा ने भी उस दिन कुछ नहीं कहा । मम्मी ने भी छोले बनाए थे उस दिन...... कितना अच्छा था वह दिन !...

माधव की डायरी

ब्लैक होल... आखिरकार दुनिया ने वह चीज भी देखनी जिस से टकराकर रोशनी तक नहीं लौटती ! अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक इसे दुनिया को समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी बता रहे हैं । भगवा घेरे ...

रम्या

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                                    (1) मैं उसकी आंखों के भीतर देखने की कोशिश कर रहा था । मेरी कोशिश थी कि उसकी आंखों में झांक कर उस लड़की को देखूं जिसने 5 बरस पहले इजहार- ए- इश्क किया था मुझसे । रम्या जब एम ए में एडमिशन लेकर कॉलेज में दाखिल हुई थी तब वह काफी अच्छी कविताएं लिखने लगी थी । हिंदी पढ़ने वाली अब तक कितनी लड़कियों से मैं मिला था , रम्या उन सब से अलग थी । उसे हिंदी इसलिए नहीं पढ़नी थी क्योंकि हिंदी पढ़ी जा सकती थी बल्कि उसे हिंदी इसलिए पढ़नी थी क्योंकि वो हिंदी ही पढ़ना चाहती थी । मुझे नहीं पता चला कि हिंदी पढ़ते-पढ़ते वह कब पढ़ने लगी मेरी कविताएं।  मेरे कई गीत उसकी खामोशियों की आवाज बने ऐसा बताया था उसने जब इजहार किया था अपने इश्क का । वह समझती थी मुझको बेहद रोमांटिक बिल्कुल मेरी कविताओं की तरह । उसे नहीं पता था कि ये कविताएं विरोधाभास हैं मेरे जीवन का ; जो सुख सौंदर्य लालसा उत्कंठा पूरी क...

नज़्म ❤🌷🌷

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मुझे  फ़िर  से नया कोई  बहाना  सोचना  होगा .. मेरी अम्मी के हाथों में कुछ एक फोटो नए फिर हैं । उन्हें कैसे  बताऊं ? एक  लड़की है  निराली सी के तस्वीरें हजारों  जिसकी मेरे  फोन  में ही  है । मुझे नफरत है खाला से ;जो हर इतवार की सुब्ह चली आती है घर मेरे ,लिए बच्चों को संग अपने उन्हीं  के पर्स  में  रखी  हुई  होती  है  तस्वीरें ; जो दोपहर तक पहुंचती है मेरी अम्मी के हाथों में। लिये   तस्वीर  हाथों  में बड़ी  बेचैन  होती  हैं अरी शबनम!बता क्या नाम है इसका?कहां की है ? लबों पर खेलती इसके तबस्सुम .. भा गई मुझको अलग रख ले ये फोटो शाम को उसको दिखाऊंगी । अरे तौबा ! ये वाली लाख बेहतर पहले वाली से अदब नज़रों में ही इसकी नज़र आती है न शबनम औ' ये रुखसार की सुर्खी तो जैसे सेब कश्मीरी । हर एक तस्वीर पहले से कुछ  बेहतर ही होती है हर एक तस्वीर के संग मुश्किलें बढ़ती हैं अम्मी की । मैं हैरत में पड़ा  यह सोचने लगता हूं कि अक्सर ये अम्मी ही तो कहती है...