#समीक्षित एक चेहरा जिसका ख़्याल आने भर से बैकग्राउंड मे सैंकड़ों वॉयलिन बज उठती हैं एक चेहरा जिसके तसव्वुर भर से हक़ीक़त के एहसास को समझा जा सकता है , शरीअत - मारिफ़त को लाँघकर . . . एक चेहरा जिसको याद करना तब-तब ज़रूरी हो उठता है जब-जब राहत फ़तेह गाते है कि - " चेहरा एक फूल की तरह शादाब है चेहरा उसका है या कोई महताब है " एक चेहरा जो ख़ुद को सियाह लिबास से ढँक अपने रंगों को छिपाने की नाकाम कोशिशें करता रहता है एक चेहरा जो एक मिनट मे बहत्तर बार सीने से हो कर गुज़रता है आज उसी नूरानी चेहरे की यौम-ए-पैदाइश है , आज उसी चेहरे का जन्मदिन है . . . पर . . . . . . पर माधव में इस बार इतनी हिम्मत नहीं कि एक फ़ोन कर उसे बधाई दे सके , एक स्टोरी , एक अदद स्टेटस अपडेट कर सके ! माधव को याद है कि पिछले बरस इसी तारीख़ को उसके मैसेज तक नही देखे गए थे और जब देखे गये तब उनको काबिल-ए-जवाब नहीं पाया गया। उस दिन को माधव ने अपनी डायरी में उसके और संवेदना के रिश्ते के आख़िरी दिन के रूप में दर्ज किया था। आज सुबह से ...
ये बच्चे जिन जगहों से आते हैं वहाँ बहुतों की ज़िंदगी 10 ×10 के कमरे में बीत जाती है, वहाँ लोगों को नहीं पता कि सिविक सेंस किस चिड़िया का नाम है, सरकारें जिन जगहों को अपने वोटबैंक के तौर पर यूज़ करती है और फिर भूल जाती हैं। इन जगहों से निकलने वाले इन बच्चों से रफ़्तार- गुफ़्तार- नशिश्त- बरख़ास्त की उम्मीद लगाना बेमानी है, अदबी रवैये की तवक़्क़ो बेकार है। इनमें से एक घर पहुंच कर सीधा दादा की दुकान पर जाएगा, और दूसरा ब्रा सिलने के लिए मशीन पर बैठ जाएगा। तीसरा जेल में बंद अपने वालिद से मिलाई पर जाएगा और चौथा घर का सिलेंडर भरवाने। पाँचवा सिले हुए कुर्ते सिर पर उठा दुकान मे देने जाएगा और छठवा साइकिल पे कुछ सामान लटका कर फेरी लगाएगा। नैतिकता-सभ्यता-सामाजिकता जैसे शब्दों को बारहाँ कुचलते हुए ये अपने और अपने परिवार के लिए कमाते ये लड़के पूरे मुस्तफ़ाबाद में घूमते है और इस पूरे इलाके को अपनी जागीर समझते हैं। इन लड़को को भूगोल दिल्ली का भी नहीं पता पर भौकाल इतना जैसे कि कनाडा को जेब में लेकर घूम रहे हो। अव्यवस्थित व्यवस्थाओं की मार के सताए हुए क्षेत्र के ये असंतुलित बच्चे किसी का सर ...
ए मेरे दोस्त ! उस दिन जब_ बरसों के बाद मिले हम तो हमारे पास बेहद कम मुद्दे थे__बात करने लायक इसीलिए बात और भी कम हुई खामोशी थी सिर्फ तादाद में बहुत ज्यादा । इधर कई बरस बीत जाने के ...
Comments
Post a Comment